ग्राम कांडी में पानी न होने से यहाँ के लोगो को पलयान करने को मजबूर कर दिया

Last Updated : Jul 02, 2020   Views : 201

ग्राम कांडी : उपेंद्र रावत की रिपोर्ट :

पहाड़ी क्षेत्रों में लोकडॉउन के चलते लोगों ने अपनी खेती पुरानी परम्पराओं के कार्य किया है। जिस तरह पुराने समय में एक दूसरे के साथ गाँव मे हेल्प करके बड़े खेतों में कार्य किया करते थे, आज गाँव मे वही चीज देखने को मिल रही है। ग्राम कांडी पट्टी सीलवाड़ टिहरी गढ़वाल के लोगों का कहना है कि खेती बाड़ी का कार्य बहुत अच्छा है, दूर कई जगहों पर खेती बहुत उपजाऊ है जगह पर फैली है। कई जगहों पर आज भी गाँव की छानीयां है बागवानी भी हमारे यहाँ अछि से हो सकती है कुछ लोगो की गांव में बागवानी भी लगी है।

परंतु ग्रामीण क्षेत्र के लोग परेशान है पानी की समस्या को लेकर 8 दशक के बाद यानी आजादी के बाद से आजतक ग्रामीण क्षेत्र की सरकारों से एक ही मांग रही है कांडी पम्पिंग योजना अठजुला क्षेत्र में जब भी कोई बड़े कार्यक्रम हुए है, उसमें क्षेत्र की हमेसा एक ही मांग रही पानी की 19 वर्ष प्रदेश सरकार को भी हो चुके है लेकिन कांडी पम्पिंग योजना आज भी नही हो पाई। इस क्षेत्र के मंचो से हर सरकार के मंत्रियों ने पम्पिंग योजना की बड़ी बड़ी घोषणाये की है,

लेकिन सब कोरी साबित हुई जब कि पर्यावरण की सन्तुलन को बनाये रखने के लिए पानी का होना अवश्य है। भारत सरकार की डबल इंजन की घोषणाये भी कोरी ही साबित हो रही है, जिसमे कहा गया घर घर नलका घर घर पानी इसी कारण गाँव के बड़ा हिसा पलायन करने को भी मजबूर हुए गाँव के लोगों का कहना है,

कि हमलोग पानी की कमी के कारण बकरी पालन ,गाय, भैंस ,भेड़ पालन भी नही कर सकते ,और बागवानी भी नही कर सकते जिसेस बहुत बड़ा रोजगार मिलता है क्युकी गर्मियों आते ही हमे सब कुछ बेचना पड़ता है बागवानी लगाते है उसमें पानी नही होता आग लगने से सब कुछ नष्ट हो जाता है।

यहाँ पे आज तक जितने भी प्रतिनिधि बने है उन्होंने भी यहाँ के लिए कुछ खास नी किया बस इलेक्शन और वोट तक ही सिमित रहा है। चुनाव जितने के बाद विकास के नाम पर कुछ भी नही, यहाँ के लोगो की एक मुलभुत पानी की मांग है जो की आज तक यैसे ही लटकी पड़ी है।


यहाँ के ग्रामीणों ने कही बार शाशन-प्रशाशन तक ये मांग रखे पर ये फाइलों तक ही सिमित रही है। ये मांग उत्तराखंड के बनने से पहले की है। आज उत्तराखंड बने हुए 19 साल हो गए है फिर भी वही पर है।


उत्तराखंड का सायद ही कोई यैसा मुख्य मंत्री होगा जिसको की यहाँ के लोगो न कांडी पानी योजना के बारे में ना लिखा हो, और चाहे यहाँ के वर्तमान और पूर्व विधायक हो सबके जानकारी में यहाँ के ये योजना है, पर वो लोगो खाली वोट से आगे तक ने बढ़ी। यह इस क्षेत्र का दुर्भागय है की इस क्षेत्र की जनता की साथ छल किया है।

गांव के  बुजुर्ग श्री जोत रावत बताते है की मेरे उम्र 80 साल हो गई है और हमारी पानी की मांग बहुत सालो से चली आ रही है उन्होंने अब उम्मीद ही छोड़ दी है की कभी यहाँ पर पानी की परेशानी दूर होगी।

और गांव में अगर कुछ होता भी है तो गर्मियों में आग लगने के कारण नष्ट हो जाता है , श्री जोत रावत बताते है पिछले साल उनका बगीचा आग के कारण जल गया था और अभी तक उसका मुआवजा नही मिला |

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