उत्तराखंड को पृथक राज्य बनवाने में पहाड़ो की रानी मसूरी का बहुत बड़ा योगदान है।

Last Updated : Sep 01, 2020   Views : 180

उपेंद्र सिंह रावत :

2 सितम्बर 1994 का वो दिन मसूरी वासी कैसे भूल सकते, 1 सितम्बर को खटीमा गोलीकांड के बाद पूरा पहाड़ गुस्से में था। उत्तराखंड अलग राज्य ले लिए पुरे पहाड़ में शांतिपूर्ण आंदोलन चल रहा था इसी बिच खटीमा गोलीकांड होता है जिसमे की 8 आंदोलनकारी शहीद हो जाते है, यही से राज्य आंदोलन की चिंगारी और तेज़ हो जाती है। पुरे पहाड़ में उबाल आ जाता है स्कूल, सरकारी दफ्तर सब बंद हो जाते है। खटीमा काण्ड के बाद मसूरी में 2 सितम्बर1994 को मौन जुलुश निकला जाता है सभी आंदोलनकारी शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते है, एकाएक पुलिस बिना किसे पूर्व चेतावनी के गोलियाँ चालान सुरु कर देती है। आंदोलनकारियों को लगता है की पुलिस रबर की गोलियाँ चला रही है, परन्तु जब लोग गिरने लगे तो लगा की ये तो वास्तव में गोलियाँ है और लोग सड़क पर गिरने लगे। चारो तरफ अफरा तफरी मचने लगी। इसमें छह आंदोलनकारी बेलमती चौहान, हंसा धनाई, युवा बलबीर सिंह नेगी, रायसिंह बंगारी, धनपत सिंह और मदन मोहन ममगाईं शहीद हो गए।साथ ही बड़ी संख्या में आंदोलनकारी गंभीर रूप से घायल हुए।
इसी की साथ पुलिस ने आंदोलनकारियों की धरपकड़ शुरू कर दी, जिससे पुरे शहर में अफरातफरी फैल गई। इसके बाद सभी आंदोलनकारियों जेल भेज दिया गया जहा पे उसके साथ अमानवीय यातनाएं दी गई। उसके बाद मसूरी में कर्फ्यू लगा दिया गया। इसके बाद कई राज्य आंदोलनकारियों पर वर्षो तक सीबीआइ अदालत में मुकदमे चलते रहे।

उसके बाद 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी ने उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की घोषणा की जिसके बाद उत्तराखंड की लोगो की आश बढ़ गई। यहाँ के लोगो को लगा की अब तो उत्तराखंड का भला होगा अपने सपनो का उत्तराखंड बनेगा । पर यहाँ की सरकारों ने अपना ध्यान ज्यादा और प्रदेश का ध्यान कम दिया।

आज उत्तराखंड राज्य बने हुए 19 साल हो गए है, अगर हम विकास और रोजगार की बात करे तो बहुत बड़ा बदलाव नही हुआ। जिस राज्य की कल्पना उत्तराखंड के आंदोलनकारियों और नागरिको ने की थी वो आज कही दूर-दूर तक दिखाई नही दे रही है। 19 साल बीतने का बाद आज भी स्थाई राजधानी का न होना इसका एक जीता जागता उदहारण है। ऊपर से अब दो – दो राजधानियों का भोझ, कैसे झेलेगा ये उत्तराखंड जहां पर पहले से हे सिमित संसाधन हो। आज भी उत्तरखंड की गावो में वो मूलभूत सुविधा नही है जिसके की वो हकदार है।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Join Us On Facebook